राजस्थान की वेशभूषा

Rajasthan ki veshbhusha kya hai ( राजस्थान की वेशभूषा क्या है) भारतीय संकृति अपने वेशभूषा तथा आभूषण को लेकर काफी संवेदनशील रहा है। भारत के कोण अनुकोण में अपने वेशभूषा को लेकर लोग काफी सचेतन तथा उन्मुक्त रहे है। 

भारत के संस्कृति में कपडे सिर्फ एक पहनावे के तौर पर नहीं बल्कि यह कला, संकृति, सभ्यता के सम्मलेन का एक लेखा जोख है। पश्चात् सभ्यता के उलट में भारत में कपड़ो से शरीर को ढक के रखना एक सभ्य तथा शिक्षित व्यक्तित्व का परिचय देता है। 

इसीलिए आप भारत के किसी भी प्रदेश में जायेंगे तो भले कपडे एक सामान न हो, परंतु उनके मकसद आपको साफ नजर आ जायेंगे। आज के इस लेख में हम चर्चा करने वाले है “राजस्थान की वेशभूषा” के बारे में। 

इस लेख में हम राजस्थान की परंपरागत कपडे और पहनावे के साथ साथ उनके कला के बारे में भी चर्चा करने वाले है।

राजस्थान की वेशभूषा 

भारत जैसी एक उत्कृष्ट सभ्य-समाज के हिस्सा होने के कारण राजस्थान में भी आपको भारतीय संकृति के झलक मिल जायेंगे। भारतीय परंपरा को समेटे यह राज्य अपने कपड़ो में तथा वेशभूषा में अपनी अनन्य कारीगरी और कला को काफी सराहा है। आज की 21वी सताब्दी में भी राजस्थान जैसी विकसित राज्य में लोग पाश्चात्य सभ्यता को छोड़ ज्यादातर लोग अपनी खुद की पहनावे में ज्यादा जोर दे रहे है।

यहाँ पुरुष तथा महिलाओं के लिए अलग अलग के परिधान होते है। पुरुष मुख्यतः धोती और कमीज के साथ सर पे पगड़ी बांधते है और औरते घाघरा चोली के साथ अपने माथे तथा शारीर को ओढ़नी से ढकी रहती है। इसके अलावा राजस्थान की कई सारी जनजाति अपने पारंपरिक पोशाक पहनते है। चलिये उन सबके बारे में विस्तार से जानते है।

पुरुषों की वेशभूषा

राजस्थान के पुरुष अपने कपडे को कई हिस्सों में पहनते है। अपने शरीर को ढकने के कमीज जो कमर से ऊपर तथा गर्दन के निचले हिस्सो में पहना जाता है। कमर के नीचे धोती तथा शेरवानी, सर के लिए पगड़ी, कमीज के ऊपर चोगा इत्यादि।

धोती :- 

यह एक लम्बा कपडा होता है जिसे पुरुष अपने कमर में बांध कर पहनते है, यह औसतन 4 मीटर लंबा तथा 90 cm तक चौड़ा होता है। इसको पायजामे के तरह पहना जाता है। ज्यादातर धोती सफ़ेद रंग के होते है, परंतु रंग बिरंगे धोती भी मिलते है। इसके अलावा आदिवासियों द्वारा पहने जाने वाला ढेपाड़ा और पंछा भी धोती ही होते है।

बिरजस – 

इससे पायजामा के तरह ही पहना जाता है।

पायजामा – 

यह शरीर के निचले हिस्सो में तथा कमर से पांव तक पहने जाने वाला वस्त्र है। इसको कमर में बंधा जाता है और यह बिलकुल आजकल के पैंट के तरह होते है।

 शेरवानी – 

यह पायजामे और कमीज दोनों को मिलाकर बनता है, यह खास किस्म के कपड़े मुस्लिम सम्प्रदाय में काफी प्रचलित है, तथा हिन्दू भी इसे पहनते है। इसके कमीज पर कई सारे कारीगरी देखने को मिलते है।

अंगरखी – 

यह पुरुषों के कमीज होते है। यह बिना कॉलर के होते है, और पूरे बाजुयो तक आते है। इनमे कोई बटन नहीं होते, बल्कि इन्हें कसें के मदद से बांधा जाता है। इसमें कई सारे रंग के विकल्प होता है, इसके अलावा इसमें राजस्थानी कारीगरी की छाप भी देखे जा सकते है। इसे बुगतरी, तनसुख, बगलबंदी भी कहा जाता है।

फरुख्शाही अंगरखी और मीनाकारी बेल वाली अंगरखी का काफी प्रचलन मिलता है, इसके अलावा सलूका भी एक प्रकार का अंगरखी होता है जिसे सहरों में पहना जाता है।

पगड़ी – 

राजस्थानी पुरुषों में पगड़ी पहना आम तथा पारंपरिक बात है। यह कपडा 5 मीटर लंबा और 40 cm चौड़ा होता है जिसे सर पर घेरा बनाकर बंधा जाता है। इसे साफा, फलियां, पाग, पेंचा, बागा और फेंटा भी कहा जाता है। बावरा 5 रंगों का और मेठरा दो रंगों का साफा होता है।

इसके अलावा पगड़ी को सजाने के लिए सरपेंच, फतेपेच, लटकन, घुगघुगी, पछेबाड़ी, बलबंदी और तुर्रे का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा आदिवासी पुरुषो द्वारा पगड़ी के जगह अंगोछा पहना जाता है।

कमरबंद- 

यह पेटिका के तरह कमर में कमीज, जामा या अंगरखी के ऊपर बांधा जाता है।

खेस – 

यह गमछा के तरह होते है, जिन्हें पुरुष अपने कंधे में डालते है।

चोगा – 

यह रेशम तथा उन के बने छोटे कपडे(कमीज के तरह) होते है जिन्हें अंगरखी के ऊपर पहना जाता है।

पछेवाड़ा और अतमसुख – 

यह सर्दियों में ठण्ड से बचने के लिए ओढ़े जाने वाले वस्त्र होते है।

स्त्रियों के वेशभूषा –

शरीर के निचले हिस्से कमर से पाव तक पहने जाने वाले वस्त्र –

घाघरा – 

यह घेरेदार वस्त्र होता है, जो घुटने या फिर उससे थोड़े नीचे तक आते है। इन्हें कमर में बंधना पड़ता है।

लहंगा – 

यह घाघरे के तरह ही होते है, पर आकर में थोड़े बड़े और पांव तक आते है।

सलवार – 

यह पायजामे के तरह ही होते है और इन्हें ज्यादार मुस्लमान संप्रदाय द्वारा पहना जाता है।

साड़ी

यह एक लंबा कपडा होता है जिसे शरीर के नीचे से लेकर ऊपर तक पहना जाता है।

शरीर के ऊपरी हिस्से तथा कमर के ऊपर पहने जाने वाले वस्त्र –

कुरता/कुर्ती – 

यह शरीर के ऊपरी हिस्सो में पहना जाता है, इसके अलावा कांचली, तिलका, आंगी, कापड़ी के पहनने के भी प्रचलन है। 

ओढ़नी – 

2.50 मीटर लंबी और 1.25 मीटर चौड़ी पतली कपडे को सर तथा शरीर को ढकने के लिए पहना जाता है, जिसे ओढ़नी कहते है। यह पोमचा, लहरिया, मोठड़ा, चुनरी, धनक आदि नाम से भी जाना जाता है।

ओढ़नी के कुछ प्रकार –

  • पिला पोमचा – बच्चे जन्म होने पर पीले रंग के ओढ़नी पहनी जाती है।
  • लहरिया – श्रवण के महीने तथा खास कर तीज में यह ओढ़नी पहनी जाती है।

आपने क्या सीखा ?

हमे आशा है की आपको Rajasthan ki veshbhusha ( राजस्थान की वेशभूषा ) विषय के बारे में दी गई जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर आपको इस विषय के बारे में कोई Doubts है तो वो आप हमे नीचे कमेंट कर के बता सकते है। आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिलेगा।

यह भी पढ़े

राजस्थान के बारे में सामान्य प्रश्न

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