राजस्थान की जलवायु कैसी है ? और इसके कितने प्रकार है ?

Rajasthan ki jalvayu ( राजस्थान की जलवायु ) मौसम तथा जलवायु और इसमें आने वाले परिवर्तन शायद बड़े शहरों में ज्यादा अनुभव न हो, परंतु गांव में कृषि के लिए तथा विश्वतापन के लिए यह काफी मायने रखती है। 

ज्यादातर कृषि और पर्यटन मौसम तथा जलवायु से काफी प्रभावित होते है। सही मौसम न होने के कारण फसलें नष्ट हो सकती है तथा पर्यटन की बात करे तो उचित मौसम के न होने से इसको भी काफी नुकसान पहुचता है। आज के इस लेख जिसका शिर्षक ” राजस्थान की जलवायु ” में हम चर्चा करने वाले है राजस्थान में महसूस होने वाली मौसम तथा जलवायु और इसमें आ रहे परिवर्तन के बारे में।

जलवायु क्या है?

जलवायु के बारे में चर्चा करने से पहले एक झलक मौसम के ऊपर भी डाल लेते है। साल में किसी निर्दिष्ट समय में अनुभव होने वाले वायुमंडलीय दशा तथा प्रभाव को हम मौसम कहते है। जैसे की हम भारत में नवम्बर-दिसम्बर से लेकर जनवरी – फ़रवरी तक हम ठण्ड का अनुभव करते है, कहीं कहीं यह काफी जल्दी आ कर देर तक भी रहता है इसे हम शर्दी के मौसम कहते है।

“किसी निर्दिष्ट स्थान पर एक लंबे समय तक (30 से 35 साल) मौसम के औसत दशा को जलवायु कहते है।” आसान भाषा में समझे तो किसी इलाके में एक लंबे समय से अनुभव होने वाली मौसम को उस इलाके की जलवायु कहा जाता है।

राजस्थान के जलवायु –

भारत के जलवायु को हम मानसून जलवायु कहते है, यह हवा के दिशा में मौसमी परिवर्तन के कारण होता है। यहां के जलवायु मुख्यतः दो ही प्रकार के हवा के चलते ज्यादा प्रभावित होते है; अरब सागर से आने वाली हवा और बंगाल के खाड़ियों से आने वाली हवा।

इन्ही दो कारणों से हम भारत में मौसमी बारिश का आनंद उठा सकते है। इसके उलट राजस्थान में मौसमी हवा का इतना प्रभाव नहीं रहता। दक्षिण-पश्चिम में चलने वाली मानसून हवा राजस्थान के अरावली पर्वत सृंखला से समान्तर रहता है, जिसके कारण मौसमी वायु में बाधा न मिलने के कारण यह बारिश करने में अक्षम रहता है।

राजस्थान में शुष्क तथा अर्ध-शुष्क जलवायु देखे जा सकते है। गर्मी के मौसम में ज्यादा गर्मी तथा शर्दी में ठण्ड अनुभव होते है। बांसवाड़ा जिले के बीच से होकर कर्क रेखा गुजरने के कारण सूरज के किरण का सीधा प्रभाव यहाँ देखे जा सकते।

अनियमित तथा कम बारिश के चलते यहाँ साल भर शुष्क मौसम का अनुभव होता है। जलवायु के आधार पर राजस्थान को 5 हिस्सों में बांटा गया है।

शुष्क जलवायु प्रदेश

जैसलमेर, बाड़मेर, पश्चिमी बीकानेर, उत्तरी जोधपुर, दक्षिण गंगानगर इस क्षेत्र में शामिल है। क्षेत्र के ज्यादातर हिस्सा मरुस्थल होने के कारण यहाँ कम बारिश और ज्यादा गर्मी अनुभव होता है। सालाना 10 से 20 cm तक के बारिश होने के कारण यहाँ ज्यादा सूखा रहता है।

अर्धशुष्क जलवायु प्रदेश

बीकानेर, गंगानगर, जोधपुर के ज्यादातर हिस्सा, पश्चिमी पाली तथा सीकर, चुरू, झुंझुनू, नागौर इस क्षेत्र में शामिल है। सालाना 20 से 40 cm के बारिश के कारण यहाँ वनस्पति और कटीली झाड़ियां पाये जाते है।

उपआर्द्र जलवायु प्रदेश

जयपुर, अजमेर, अलवर, सीकर, झुंझुनू, पाली, भीलवाड़ा, टोंक, सिरोही आदि शामिल है। सालाना 40 से 60 cm बारिश के कारण यहाँ सघन वनस्पति देखे जाते है जो के काफी विरल किस्म के होते है।

आर्द्र जलवायु प्रदेश

धौलपुर, सवाई, माधोपुर, भरतपुर, कोटा, बूंदी, दक्षिणी-पूर्वी टोंक, उत्तरी चितौड़गढ़ आदि इस क्षेत्र में आते है। सालाना यहाँ 60 से 80 cm की बारिश होती है।

अतिआर्द्र जलवायु प्रदेश

झालावाड़, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, दक्षिण-पूर्व कोटा, दक्षिण-पूर्व उदयपुर, माउंट आबू क्षेत्र आदि इसमें शामिल है। यहाँ सालाना 80 से 150 cm का बारिश के कारण सघन वनस्पति परिलक्षित होते है।

राजस्थान के पश्चिमी इलाके में दिन में ज्यादा तापान्तर परिलक्षित होता है। जैसलमेर में गर्मियों के दिन में सबसे ज्यादातर तापान्तर देखा जा सकता है। माउंट आबू राजस्थान का सबसे आर्द्र इलाका है, इसे राजस्थान का शिमला भी कहा जाता है। 

अक्सर दिन में धूल भरी आंधी चलती रहती है, जिसको भभुल्या कहा जाता है। गंगानगर जिले में सबसे ज्यादा भभुल्या पाया जाता है। रेगिस्थान में दिन के समय चलने वाली गर्म हवा को लू कहा जाता है।

आपने क्या सीखा ?

हमे आशा है की आपको Rajasthan ki jalvayu ( राजस्थान की जलवायु ) विषय के बारे में दी गई जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर आपको इस विषय के बारे में कोई Doubts है तो वो आप हमे नीचे कमेंट कर के बता सकते है। आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिलेगा।

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राजस्थान के बारे में सामान्य प्रश्न

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