राजस्थान का राज्य वृक्ष कौनसा है ?

Rajasthan ka rajya vriksh

Rajasthan ka rajya vriksh kya hai ( राजस्थान का राज्य वृक्ष क्या है) मानव समाज और प्रकृति को हमेशा समांतर रेखा में चलना चाहिये। अगर किसी रेखा की एक भी कड़ी टूटी तो यह पूरी धरती के लिए चिंता का विषय बन सकता है। 

प्रकृति मनुष्य के जीवन धारण के लिए हर वो चीज़ मुहैया करवाती है जिसकी आवश्यकता मनुष्य को पड़ती है। मगर लालची इंसान अपने जरुरत से ज्यादा वस्तुओ को प्रकृति से लेकर दुनिया को ध्वंसभिमुखी बना रही है। हमारे पूर्वज प्रकृति के महत्व को समझ कर उसकी सुरक्षा का खयाल रखते थे।

इसी संदर्भ में चिंता करके भारत तथा दुनिया भर के सभी देशों ने अपने कुछ प्रतिक के रूप में ऐसी प्रकृति के वस्तुयों को स्थान दिए हुए है। आज हम इस शिर्षक ” राजस्थान की राज्य वृक्ष” में चर्चा करने वाले है राजस्थान की राज्य वृक्ष के बारे में, तथा जानेंगे इससे जुड़ी कई सारे रोचक तथ्य के बारे में।

राजस्थान का राज्य वृक्ष क्या है ?

राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी है। इसको खेजड़ी के अलावा भी कई और नाम से भी जाना जाता है। गुजराती में शमी और सुमरि, तमिल में वणणी, सिंध में कांडी, उत्तरप्रदेश में छोंकरा, पंजाबी में जंड, अरब में घफ तथा राजस्थान में इससे खेजड़ी के अलावा जांट, जांटी और सांगरी भी कहा जाता है। खेजड़ी का  वैज्ञानिक नाम प्रोसोपिस सिनेरारिया है।

“रेगिस्थान गौरव” तथा “थार का कल्पवृक्ष” से परिचित यह वृक्ष रेगिस्थान में पनपने के लिए ही विकसित हुआ है। दुनिया भर के कई सारे हिस्सो में पाई जाने वाला यह वृक्ष  गर्मी के मौसम में भी  रेगिस्थान के कड़कती धुप में हराभरा रहता है। 

जब पुरे रेगिस्थान में धुप तथा पानी के कमी के वजह से झाड़ियां तक मर जाती है तब भी यह वृक्ष अपने ठंडी छाया के नीचे मवेशी तथा पथिक को कुछ देर आराम फरमाने के लिए जगह देती है। इसके पत्तियां जो के लूंग के नाम से जाना जाता है, मवेशियों को गर्मी के दिन पेट भरता है। खेजड़ी के फूल को मिंझर कहते है, तथा इसके हरे फल को लोग सब्जी के तरह भी कहते है जो के सांगरी के नाम से जाना जाता है इसी लिए इस पेड़ का नाम सांगरी भी है। 

फल सूखने पर इसे खोखा कहा जाता है, जो के एक किसम का सूखा मेवा होता है। इसकी लकड़ी तथा जेड काफी मजबूत होते है, इसकी लकड़ी जलाने और फर्नीचर बनाने के काम आते है तथा इसके जड़ से हल भी बनता है। इसके बारे में एक रोचक जानकारी यह भी है कि 1899 में जब अकाल पड़ा था तो लोग इसके छिलके को खाकर जिन्दा रहे थे।

खेजड़ी वृक्ष के महत्व

कहते है इस पेड़ के नीचे अनाज उगाने से ज्यादा उगते है। खेजड़ी वृक्ष का महाभारत में भी सम्बन्ध है, कहते है जब पांडवों अज्ञान्त वास में थे तब वे इस पेड़ में अपने हतियार को छुपाया था। इस पेड़ के नीचे विश्नोई संप्रदाय के रामोजी विश्नोई के पत्नी अमृता देवी के साथ 363 लोगो की हत्या की गयी थी। इस वलिदान को याद करते हुए हर साल 12 दिसंबर को खेजडली दिवस मनाया जाता है।

इस पेड़ को 1983 में राज्य वृक्ष घोषित किया गया था। इसके सम्मान में 5 जून 1988 के विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 60 पैसे का डाक टिकट का भी प्रचलन हुआ था। यह वृक्ष शेखावटी और नागौर क्षेत्र में ज्यादा पाये जाते है। इसकी आयु लगभग 5000 सालों तक का हो सकता है। 1000 साल से भी पुराने दो वृक्ष मांगलियावास गांव तथा अजमेर में मिले है।

आपने क्या सीखा ?

हमे आशा है की आपको Rajasthan ka rajya vriksh ( राजस्थान का राज्य वृक्ष ) विषय के बारे में दी गई जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर आपको इस विषय के बारे में कोई Doubts है तो वो आप हमे नीचे कमेंट कर के बता सकते है। आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिलेगा।

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