राजस्थान का राज्य पक्षी कौनसा है ? यह कहा पाया जाता है ?

Rajasthan ka rajya pakshi

Rajasthan ka rajya pakshi

Rajasthan ka rajya pakshi kaun sa hai ( राजस्थान का राज्य पक्षी कौनसा है) उन्मुक्त गगन में पंख फैलाये पक्षियों को बचपन में देख कर हम सबको आसमान की सैर करने का कभी न कभी मन हुआ होगा। निर्भीकता से उड़ते पक्षी हमे आज़ादी और स्वतंत्र होने का अहसास दिलाती रहती है। 

जिन्दगी की बाधायों का मुकाबला करके आगे बढ़ते रहने की हमे प्रेरणा प्रदान करती है। आज के इस लेख में हम चर्चा करने वाले है “राजस्थान के राज्य पक्षी” के बारे में और जानेंगे इनके कुछ खूबियों के बारे में। 

राजस्थान का राज्य पक्षी क्या है ?

राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण है. घास के मैदान, शुष्क और अर्ध-शुष्क इलाके में पाई जाने वाला गोडावण पक्षी उड़ने वाले सभी पक्षियों में सबसे वजनदार होने के कारण यह सुतुरमुर्ग की भांति भ्रम पैदा करते है। 

राजस्थान समेत पंजाब, ओडिशा, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्णाटक, आन्ध्रप्रदेश और तमिलनाडु में पाई जाने वाले यह पक्षी अब घटकर सिर्फ गुजरात, महाराष्ट्र, आन्ध्रप्रदेश, कर्णाटक और राजस्थान में ही पाये जाते है।

ग्रेट इंडियन बस्टर्डस के नाम से जाने जाना वाला यह पक्षी भारतीय तिलौर और गुरायिन के नाम से भी जाना जाता है। गोदावण का वैज्ञानिक नाम “आरडेओटिस निग्रिसेप्स” है। यह पक्षी “गभीर रूप से संकटग्रस्त” पक्षियों के श्रेणी में शामिल है तथा भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत 1972 के अनुसूची 1 में भी रखा गया है।

राजस्थान सरकार द्वारा 1981 में गोडावण को राज्य पक्षी घोषित किया गया। इनकी सुरक्षा तथा संख्या में इजाफा के लिए राजस्थान सरकार द्वारा योजना प्रस्तुत किये गए जिसका टैग लाइन “मेरी उड़ान को न रोकें” था। भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा “species recovery programme” में 17 प्रजातियों में भी गोडावण सामिल है।

गोडवण पक्षी का आकार

गोडावण पक्षी देखने में बड़े, लंबा शारीर और गर्दन होती है। इनका शारीर का रंग हल्के भूरे तथा सफ़ेद छीटे होते है, जब की इनकी लंबी गर्दन बिलकुल सफ़ेद रंग का होता है। इनके मस्तक में काले रंग के छोटे पर टोपी की भांति नजर आती है। यह पक्षी 1 मीटर तक लंबे होते है और 15 किलो तक वजनी हो सकते है।

प्राकृतिक निवास –

शुष्क तथा अर्ध-शुष्क घास के मैदान, कांटेदार झाड़ियां, लंबे घास के मैदान में पाए जाते है। यहाँ इन्हें शिकारियों से छुपने तथा भागने के लिए आसानी होती है। यह पक्षी दलदली इलाको से बचते है।

आहार प्रवृत्ति –

यह पक्षी सर्वाहारी श्रेणी में आते है। अनाजों में ये गेहूं, ज्वार, बाजरे आदि को खाते है। जिनके वजह से लोग इन्हें अपने फसल के लिए खतरा मानकर इनका शिकार करते है। मगर यह पक्षी फसल को हानि पहंचाने वाले टिड्डे तथा अन्य कितपतंगों का शिकार करके उन्हें खा जाते है। कभी कभी सांप, छिपकली और मेंढक के मिलजाने पर भी ये उन्हें खा लेते है।

खतरे में है गोडावण ?

शांत स्वभाव का यह पक्षी अक्सर मैदानी इलाके में रहने के कारण बड़े ही आसानी से शिकारियों के नजर में आ जाता है। भेड़िया, लोमड़ी, गीदड़ के साथ साथ जंगली बिल्लियां इनके शिकार में माहिर है। इसके अलावा इनके मांस के कारण लोग इनका सीकर किया करते है। 

यह पक्षी उड़ तो सकते है पर लंबी दूरी तय नहीं कर पाते, शिकारियों के नजर आते ही यह पक्षी भागने लगते है जिसके वजह से घात लगाकर मारने में यह काफी आसान शिकार बन जाता है। सरकार द्वारा इनके शिकार पर रोक लगाने के लिए इनके शिकार करने पर 10 साल की सजा तथा 25 हजार रुपये तक के जुर्माने के प्रबंधन है।

आपने क्या सीखा ?

हमे आशा है की आपको Rajasthan ka rajya pakshi ( राजस्थान का राज्य पक्षी ) विषय के बारे में दी गई जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर आपको इस विषय के बारे में कोई Doubts है तो वो आप हमे नीचे कमेंट कर के बता सकते है। आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिलेगा।

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