दक्षिण भारत की गंगा किसे कहते है ?

Dakshin bharat ki ganga

Dakshin bharat ki ganga

Dakshin bharat ki ganga ( दक्षिण भारत की गंगा ) नदियों के उत्पन्न से ही वे मानव कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आए है। दुनिया का सबसे पहला मानव बस्ती भी नदी किनारे ही बसा था। 

सालभर पानी का मिलना तथा नदी किनारे उपजाऊ मिटटी से खेती में मदद के चलते सदियों से इंसान नदी के किनारे तथा इसके आसपास के इलाके में ही बसने लगे है। भारत में नदियों को पवित्र माना जाता है। 

इसके दो कारण हो सकते है, पहला तो यह रोजमर्रे के पानी की जरुरत जैसे के खाना,पीना, कपडे धोना आदि के लिए जल मुहैया करवाता है और दूसरा खेती में भी मदद मिलती रहती है। नादिया सिर्फ जीवनदायी ही नहीं होती बल्कि इनका एक कराल रूप भी होता है बाढ़ के समय। खैर भारत के पवित्र नदियों में से गंगा नदी का स्थान सर्वोपरे है। 

यह सिर्फ एक नदी ही नहीं बल्कि करोड़ो लोगो की आस्था है। यह नदी इतना पवित्र माना जाता है कि हर सुभ कार्य में इसका पानी जरूर लगता है। गंगोत्री हिमवाह से भागीरथी के नाम से उद्गम यह नदी मध्य भारत समेत पूर्व भारत के कई सारे हिस्से में फैली हुई है। मगर दक्षिण भारत में यह प्रवेश करने से पहले ही गंगा डेल्टा में जा मिलता है।

दक्षिण भारत की गंगा

मान्यताओं के हिसाब से कावेरी नदी को दक्षिण भारत की गंगा कहा जाता है। कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में बहने वाली यह नदी कर्नाटक तथा तमिलनाडु की मुख्य नदी और कृषि कार्य में विशेष सहायक नदी है। इन राज्यो के आधे से ज्यादा किसान इस नदी के पानी के ऊपर खेती के लिए निर्भर रहते है।

कावेरी नदी उद्गम स्थल

कर्नाटक के पश्चिम घाट में स्थित ब्रह्मगिरि पर्वत से निकलने वाली यह नदी एक सदानीरा नदी है। ब्रह्मगिरि में स्थित कोडागु के तलकावेरी ही इसका मुख्य स्रोत मन जाता है। कर्नाटक और तमिलनाडु के मुख्य नदी होने के कारण आज भी इस नदी को लेकर दो राज्यो में विवाद छेड़ा हुआ है।

कावेरी नदी की लंबाई

कावेरी नदी की कुल लंबाई 805 किलोमीटर है। जिसमे से 320 किलोमीटर कर्नाटक में और 416 किलोमीटर तमिलनाडु में है। इतनी लंबी होने के साथ साथ सदानीरा होने के वजह से यह दक्षिण भारत का सबसे खास तथा अहम नदी के श्रेणी में गिना जाता है।

कावेरी नदी की सहायक नदियां

कावेरी नदी के कई सारे सहायक नदी होने के कारण यह सदानीरा नदी है। जिनमे से हारंगी, हिमावती, शिमशा, अर्कावती, लक्षमतीर्थ, कब्बानी, सुवर्णवती, भवानी, नॉयली, अमरावती अदि शामिल है।

साल भर इन नदियों से मिलने वाले पानी के वजह से यह नदी कभी नहीं सूखता, जिससे किसानों को खेती में दिक्कते नहीं आती। इसके अलावा कावेरी डेल्टा में ऊपर से लायी हुई उपजाऊ मिटटी के चलते फसल बहतर उगाई जाती है। 

यह एक वजह है कि इस नदी को दक्षिण में इतना महान माना गया है। 805 किलोमीटर की दुरी तय करने के बाद यह नदी बंगाल की खाड़ी में जा मिलती है।

कावेरी नदी को दक्षिण भारत की गंगा क्यों कहा गया है?

गंगा नदी के तरह प्रवाहित होने और कई सारे उपनदियों के चलते यह दक्षिण भारत की एक प्रमुख नदी है। नदी किनारे कई सारे आध्यात्मिक क्षेत्र के अलावा साल भर किसान को पानी देकर फसल उगाने में मददगार यह नदी उनके जीवनरेखा सामान सहायक बनी हुई है।

आशा है आप सबको हमारा यह पोस्ट अच्छा लगा होगा। अपना विचार और राय हमे कमेंट्स में जरूर लिखे।

आपने क्या सीखा ?

हमे आशा है की आपको Dakshin bharat ki ganga ( दक्षिण भारत की गंगा ) विषय के बारे में दी गई जानकारी अच्छी लगी होगी। अगर आपको इस विषय के बारे में कोई Doubts है तो वो आप हमे नीचे कमेंट कर के बता सकते है। आपके इन्ही विचारों से हमें कुछ सीखने और कुछ सुधारने का मोका मिलेगा।

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